संगीत का हमारे ऊपर क्या प्रभाव पड़ सकता है????
आख़िर ये ध्वनी तरंगो से ज्यादा कुछ भइ तो नहीं हैं,
फ़िर भी क्यों एक अच्छी धुन सुनते ही हम उसमे खो जाते हैं, और थोडी भी बुरी लगने पर गर्दन टेढी होने लगती है?
शायद इसका सम्बन्ध मस्तिष्क की बनावट से है,क्योंकि सबकी पसंद एक सी नहीं होती,
किसी को एकदम सरल संगीत पसंद आता है, तो किसी को एक तेज ,तड़क भड़क वाला,
पर मैं कोई डॉक्टर तो नहीं हूँ जी अब मस्तिस्क की सरंचना समझने बैठ जाऊं,
और ना ही कोई कवि हूँ, जो इस बात पर ही कविता लिख डालूँ ,
पर हाँ मैं इतना तो समझता हूँ की संगीत का हमारे जीवन,हमारे व्यक्तित्व पर क्या सामान्य प्रभाव है........
सामान्यतः जो लोग धीमा संगीत पसंद करते हैं.जैसे ग़ज़ल, या Soft Romantic Songs, वे लोग शांत स्वाभाव के होते हैं, जीवन को अधिकतम आराम के साथ जीने का प्रयास करते हैं, दिल के सच्चे और बातचीत में नपे तुले शब्दी का प्रयोग करने और भीड़ से दूर रहने वाले और हाँ कभी- कभी तो अपने आप से ही बातें करते दिख जाते हैं.......
इसके ठीक विपरीत, जो लोग तेज संगीत पसंद करते हैं, उनका व्यक्तित्व भी वैसा ही होता है, तड़क भड़क वाला...
ये लोग हमेशा भीड़ से घिरे या भीड़ का हिस्सा बने दिख जाते हैं,
हर पल कोई नया प्रयोग करने को तैयार, शब्दों पर कोई रोक टोक नहीं होती और किसी का भी मजाक उड़ते या चिढाते हुए पाये जाते हैं....
इन दो प्रकार के लोगों के अलावा आजकल एक तीसरा प्रकार भी दिखने लाग है...
जो पुराने गानों को Retro कह कर सुनता है, और नए गानों को भी बड़े चाव से सुनता है...
तो अब क्या इस पर दोनों प्रकार के संगीत का असर होगा??
जवाब है..... हाँ, बिल्कुल, इसपर दोनों प्रकार के संगीत का असर होगा, और इसका व्यक्तित्व भी मिश्रित प्रभाव होगा,
ये भीड़ के सामने सबकी नजरो का केन्द्र बनने की काबिलियत रखेगा,
पर उससे पहले भीड़ का प्रकार भी ध्यान में रखेगा, क्योंकि कुछ जहग नज़रों का के बनना खतरनाक साबित होता है....
कुछ बोले से पहले थोड़ा सोचेगा, नपे तुले तो नहीं पर हाँ सधे हुए शब्दों में जवाब देगा...
अकेलेपन से न डरने वाला, भीड़ में आत्मविश्वासी , चंचल तथा गंभीर व्यक्तित्व को स्तिथि के अनुसार बदलने वाला और अपने साथ साथ दूसरो के जीवन में आराम ध्यान रखने वाला होगा...
तो सार ये है, की सिर्फ़ धीमा संगीत ही नहीं समयानुसार तेज संगीत भी सुने,
यह न केवल आपके व्यक्तित्व का विकास करेगा, बल्कि आपकी समस्याओं को भी कम करनेमे सहायक साबित होगा....
अब सोचिए यदि आपके पास एक म्यूजिक प्लेयर है, और एक ही वक्त पर आप और आपके भाई-बहन उस पर उनकी पसंद के गाने सुनना चाहते हैं, जो आपको बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं....
अब आप ऐसे में दो काम कर सकते हैं,
या तो उन्हें डांट दे और अपनी पसन के गाने सुने॥
या उनकी पसंद के संगीत पर ध्यान देने की कोशिश करे, हो सकता है आपको पसंद ही आ जाए...
और अगर न पसंद आए तो अपना कंप्यूटर करे, और मेरे इस ब्लॉग पर कोई कमेन्ट छोड़ दें :)
फ़ैसला आप पर है...
आशा करता हूँ आपको ये ब्लॉग पसंद आया होगा...
सुनते रहिये अपने अप्संद का संगीत...
और हाँ कमेन्ट जरूर छोडियेगा.....
अंजित
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